मौर्य वंश का संस्थापक | maurya vansh in hindi 

मौर्य वंश के सत्ता में आने के पहले नंद वंश का साम्राज्य था. वह अत्यंत क्रूर तथा प्रजा का शोषण करता था और क्षत्रिय वंश को समाप्त करना चाहता था. इन सभी कारणों से मगध की जनता नंद वंश से घृणा करने करने लगी थी.

मौर्य-वंश
मौर्य वंश

इसी का लाभ उठाकर चंद्रगुप्त मौर्य और चाणक्य ने अपने युद्ध कौशल तथा कूटनीति से नंद वंश को समाप्त कर मौर्य साम्राज्य स्थापित किया. मौर्य वंश की स्थापना का मुख्य उद्देश्य अखंड भारत का निर्माण करना था.

मौर्य वंश के संस्थापक 

मौर्य वंश की स्थापना प्राचीन भारत का एक महत्वपूर्ण घटना था। चंद्रगुप्त मौर्य एक क्षत्रिय कुल के थे। चंद्रगुप्त ने आचार्य चाणक्य की सहायता से नंद वंश को पराजित कर मौर्य साम्राज्य की स्थापना की।

इनके बारे में प्राचीन ग्रंथों से कई महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त होता है। इस वंश के राजाओं का बौद्ध धर्म तथा जैन धर्म की ओर झुकाव ज्यादा था। जिसके कारण बौद्ध तथा जैन लेखकों ने मौर्य वंश के बारे में कई ग्रंथ लिखे हैं जिनमें से दिव्यादन, महाबोधिवंश, महावंश और दीपवंश तथा जैन धर्म में परिशिष्टवर्मन ग्रंथ है। 

इसके अतिरिक्त आचार्य चाणक्य( कौटिल्य) के द्वारा रचित अर्थशास्त्र ग्रंथ है जिसमें मौर्य वंश के बारे में अधिक जानकारी प्राप्त होता है. तथा कई स्थानों पर स्वयं सम्राट अशोक ने मौर्य वंश के बारे में बताया है। अशोक ने अपने विशाल साम्राज्य में कई स्थानों पर अपनी राज आज्ञा को शिलाओं और स्तंभों पर खुदवाया। इन शिलालेखों और स्तंभ लेखों में मौर्य प्रशासन तथा तत्कालीन जनजीवन के बारे में उल्लेख मिलता है।

कौटिल्य का अर्थशास्त्र

कौटिल्य रचित अर्थशास्त्र राजनीतिक शास्त्र का ग्रंथ है. 1905 में डॉ. आर.शामा शास्त्री को इस पुस्तक की पांडुलिपि मिली तथा उन्होंने 1914 में इसे प्रकाशित किया. भारतीय परंपरा में कौटिल्य को चंद्रगुप्त का मुख्य सलाहकार और मंत्री बताया गया है. कौटिल्य के अर्थशास्त्र में मौर्य वंश के शासन धातु ज्ञान और सैनिक संगठन के बारे में विवरण मिलता है.

अर्थशास्त्र की रचना मौर्य काल में हुआ था. शास्त्र में बहुत सारी बातें हैं जो मौर्य काल पर एकदम सही साबित हुआ है. प्रांत की सहायता से मौर्य साम्राज्य की शासन व्यवस्था, व्यवस्था कानून और समाज का पूरा विवरण प्राप्त होता है.

मेगस्थनीज का विवरण

मेगस्थनीज एक यूनानी राजदूत था.जिसे सिकंदर के बाद उसके साम्राज्य के पूर्वी भाग पर शासन करने वाले यूनानी शासक सेल्यूकस ने चंद्रगुप्त के दरबार में भेजा था.उसने भारतवर्ष के बारे में इंडिका नामक पुस्तक लिखी है. जिसमें मौर्य वंश के बारे में भी लिखा गया है. मेगस्थनीज ने भारत के भौगोलिक राजनीतिक तथा सामाजिक स्थिति के बारे में भी बताया है.

उसने यहां की नदियों और पर्वतों के नाम भी दिए हैं. उसके अनुसार यहां की सबसे बड़ी नदी गंगा है जो पर्वती प्रदेश से निकलकर मैदान में बहती हुई पाटलिपुत्र(पटना)के निकट समुद्र में गिरती है. उसके अनुसार पाटलिपुत्र 9.5 मील लंबा 1.75 मील चौड़ा बसा हुआ था. इसके चारों ओर लगभग 600 फीट चौड़ी तथा 30 हाथ गहरी खाई थी.

नगर के चारों ओर एक ऊंची दीवार था जिसमें बुर्ज और द्वार बने हुए थे. उसने मौर्य राजप्रसाद का उल्लेख करते हुए कहा है की भव्यता में सुसा और एकबटना के प्रसाद भी उसकी समानता नहीं कर सकते थे.

मेगस्थनीज के अनुसार भारतीय समाज 7 जातियों में बटा हुआ था. ब्राह्मण, कृषक, ग्वाले और शिकारी, व्यापारी, मजदूर, निरीक्षक, मंत्री और सलाहकार. वास्तव में मेगस्थनीज भारतीय समाज के स्वरूप को ठीक से समझ नहीं पाया वह गलती से व्यवसाय को जाति समझ बैठा.

इस समय समाज में बहु विवाह की प्रथा थी. शिक्षा का कार्य ब्राह्मणों के हाथ में था .भूमि उपजाऊ था और किसान साल में दो फसल लेते थे. राज्य की ओर से खेतों की सिंचाई का ध्यान रखा जाता था.

मौर्य वंश की सूची

  • चंद्रगुप्त मौर्य
  • बिंदुसार
  • अशोक
  • कुणाल
  • दशरथ
  • संप्रति
  • शालीसुख
  • देववर्मन
  • शतधन्वन
  • बृहदरथ

चंद्रगुप्त मौर्य

चंद्रगुप्त मौर्य भारतवर्ष का एक महान शासक था. जिसने भारत वर्ष के शत्रुओं का नाश कर दिया और एक शक्तिशाली राज्य स्थापित किया. चंद्रगुप्त मौर्य का जन्म 350 ईसा पूर्व के आसपास माना जाता है. माता का नाम मोरा तथा पत्नी का नाम दुर्धारा था.

एक कथा के अनुसार नंद राजा ने चाणक्य( कौटिल्य) का अपनी दरबार में अपमान किया था. इस अपमान का बदला लेने के लिए कौटिल्य ने चंद्रगुप्त को पूर्ण रूप से शिक्षित तथा युद्ध कौशल में निपुण कर एक विशाल सेना का गठन कर नंद वंश पर आक्रमण कर उसे युद्ध में पराजित कर दिया.इसके बाद मगध का सम्राट चंद्रगुप्त मौर्य बना.

चंद्रगुप्त मौर्य का मगध का राजा बनने के बाद उसने बंगाल से लेकर सिंधु तथा अफगानिस्तान तक के प्रदेशों को जीत लिया था तथा भारत के अधिकांश राजाओं को पराजित कर अपने राज्य का विस्तार किया. उसने कई छोटे-छोटे राज्यों के स्थान पर एक साम्राज्य स्थापित क्या.

बिंदुसार

चंद्रगुप्त की मृत्यु के बाद पुत्र बिंदुसार मौर्य साम्राज्य का शासक बना. बिंदुसार एक कुशल और शक्तिशाली शासक था. उसने अपना राज कार्य सही ढंग से चलाया और उसे उत्तराधिकार में मिले विशाल साम्राज्य को बनाए रखा. राज्य में जो भी विद्रोह हुए उनका सफलतापूर्वक दमन किया.

अशोक और सुशीम बिंदुसार के पुत्र थे.इनके अलावा बिंदुसार के और भी पुत्र थे मगर इन दोनों का उल्लेख अधिक मिलता है

अशोक

बिंदुसार की मृत्यु के बाद अशोक मगध की राज गद्दी पर बैठा. यह मौर्य वंश का सबसे शक्तिशाली राजा था. इसने सभी शत्रुओं को पराजित कर अखंड भारत का निर्माण किया. सम्राट अशोक की माता का नाम सुभाद्रांगी था जो एक ब्राह्मण की पुत्री थी.

बौद्ध ग्रंथों के अनुसार बिंदुसार की 16 पत्नियां और 101 संताने थी. जिसमें सुशीम सबसे बड़ा पुत्र था. बड़ा पुत्र होने के कारण मगध का सम्राट सुशीम को बनना था पर ऐसा हुआ नहीं क्योंकि सुशीम एक कुशल उत्तराधिकारी नहीं था. इस कारण अशोक ने उसे मार कर राजगद्दी पर बैठा.

सम्राट अशोक की कई पत्नियां थी. पर मुख्य रूप से असिन्धमित्रा, तिष्यरक्षिता और देवी का नाम आता है. कुणाल अशोक का पुत्र था जो अशोक के बाद राज्य का उत्तराधिकारी बना.इसके उपरांत महेंद्र और संघमित्रा भी अशोक की संताने थी. जिन्होंने लंका तक बौद्ध धर्म का प्रचार प्रसार किया. सम्राट अशोक एक कुशल शासक था. जिसने अपनी प्रजा का पूर्ण रूप से ध्यान रखा.

 पतन

अशोक के बौद्ध धर्म अपनाने के कारण उनके कई सामंत उनसे बहुत नाराज थे तथा बौद्ध धर्म के पक्ष मे नहीं थे । इस कारण कुछ सामंतों ने अपने आप को स्वतंत्र घोषित कर दिया । अशोक ने 84 हज़ार बौद्ध स्तूप बनाकर राजकोष खाली कर दिया जिसके कारण राज्य को आर्थिक संकट का सामना करना पड़ा ।

जिससे प्रजा पर कर बढ़ा दिया गया । बौद्ध स्तूपों की देख रेख का खर्च जनता पर पड़ने लगा ।

सम्राट अशोक की मृत्यु के बाद मौर्य वंश का पतन आरंभ हो गया था । उसके बाद उसका पुत्र कुणाल मगध की राजगद्दी पर बैठा था । सम्राट अशोक के बाद मौर्य वंश के शासक राज्य को चलाने मे पूर्ण रूप से सक्षम नहीं थे ।

पतन के कारण

  • अयोग्य उत्तराधिकारी
  • करों मे वृद्धि करना
  • अशोक की धम्म नीति
  • राष्ट्रीय चेतना का अभाव
  • आर्थिक संकट
  • शासन का अतिकेंद्रीकरण

मौर्य वंश का अंतिम शासक

मौर्य साम्राज्य का अंतिम शासक बृहदरथ था । यह एक निर्बल शासक साबित हुआ राज्य मे यवनों का आक्रमण लगातार बढ़ता जा रहा था तथा मगध के कई क्षेत्रों पर अपना अधिकार कर लिए थे । बृहदरथ बौद्ध धर्म का अनुयायी था और हिंसा नहीं करना चाहता था ।

यवनों के आक्रमण के समय इसने कोई ठोस कदम नहीं उठाया इन सबके कारण पुष्यमित्र शुंग ने बृहदरथ की हत्या कर मगध की राजगद्दी पर बैठा था ।

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