आचार्य रामचंद्र शुक्ल जीवन परिचय

आचार्य रामचंद्र शुक्ल का जन्म सन 1884 में उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले के अगोना गांव में हुआ था. इनके पिता का नाम चंद्रावली पांडे था. इन्होंने संस्कृत की शिक्षा घर पर प्राप्त की थी और इंटरमीडिएट तक की स्कूली शिक्षा इन्हें मिल पाई. अपनी प्रखर प्रतिभा के बल पर इन्होंने प्रसिद्ध साहित्यकारों के बीच अपना विशिष्ट स्थान बना लिया था.

आचार्य रामचंद्र शुक्ल
आचार्य रामचंद्र शुक्ल

 

रचनाएं

निबंध – चिंतामणि भाग 1, चिंतामणि भाग 2, विचारा विथि त्रिवेणी.

इतिहास – हिंदी साहित्य का इतिहास, मेगास्थनीज का भारतवर्षीय वर्णन.

आलोचना- काव्य में रहस्यवाद, रस मीमांसा, काव्य में अभिव्यंजनावाद.

संपादित- भ्रमरगीत, तुलसी ग्रंथावली, जायसी ग्रंथावली, हिंदी शब्द सागर.

काव्य- बुद्धचरित्र, अभिमन्यु वध.

अनुदित- विश्व प्रपंच , दर्श जीवन.

भाषा शैली

आचार्य रामचंद्र शुक्ल जी अपनी शैली के लिए निबंध संसार में विख्यात है. वह किसी गंभीर बात को सूत्र रूप में कहते थे फिर उस सूत्र वाक्य को व्यास शैली में तरह-तरह के उदाहरणों द्वारा समझाते थे.

साहित्य में स्थान

आचार्य रामचंद्र शुक्ल जी युग प्रवर्तक निबंधकार के रूप में सदैव स्मरणीय रहेंगे. उन्होंने हिंदी साहित्य का इतिहास लिखकर अमृत प्रदान किया है उनकी आलोचना में भारतीय एवं पाश्चात्य समीक्षा का सुंदर समीकरण मिलता है. उन्होंने साहित्य के विभिन्न क्षेत्रों में जो मापदंड स्थापित किए हैं वह स्थाई रहेंगे डॉ हजारी प्रसाद द्विवेदी ने उनके बारे में ठीक ही कहा है-  उनके निबंध केवल हिंदी भाषा की ही अमूल्य निधि नहीं है समूचे भारतीय साहित्य में महत्वपूर्ण स्थान पाने के योग्य भी हैं.

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